अमेरिका में सर्वसम्मति से प्रस्ताव हुवा पास,लद्दाख पर अमेरिकी संसद में भारत के लिए समर्थन

अमेरिका में सर्वसम्मति से प्रस्ताव हुवा पास,लद्दाख पर अमेरिकी संसद में भारत के लिए समर्थन

China Pulls Back
  • अमेरिकी सांसद ने कहा, भारतीय क्षेत्र पर कब्जे के प्रयास में हे चीन।
  • भारतीय मूल की मी बेरा तथा अन्य सांसद स्टीव शेबेट ने निचले सदन में प्रस्ताव किया था।

वाशिंगटन : अमेरिकी निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने लद्दाख गतिरोध के लिए भारत के समर्थन में एक प्रस्ताव किया गया था। भारतीय मूल के ऐमी बेरा तथा अन्य सांसद स्टीव शेबेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा प्राधिकरण अधिनियम (एनडीएए) में सुधारा का प्रस्ताव किया गया था। जिसे अमेरिकी सदन में सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया है।

प्रस्ताव में कहा, “चीन ने गाल्वान घाटी में बोहत आक्रामकता दिखाई है। चीन ने कोरोना पर ध्यान आकर्षित करते हुवे भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा करने की कोशिश की है।

भारत-चीन LAC, दक्षिणी चीन सागर और सेनकाकू द्वीप जैसे विवादित क्षेत्रों में चीन का क्षेत्र और आक्रामकता एक गहरी चिंता का विषय है।

चीन दक्षिण सागर में अपने क्षेत्रीय दावे को मजबूत करने की बोहत पैमानेपे कोशिश कर रहा है। दक्षिण सागर का 13 लाख वर्ग मील विस्तार को चीन अपना विस्तार बता रहा हे। चीन इन क्षेत्र के द्वीपों पर सैन्य ठिकाने बना रहा है।

जबकि ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान, फिलीपींस तथा वियतनाम भी इन क्षेत्रों पर दावा करते हैं।

अमेरिकी सांसद का दावा: LAC पर 5000 चीनी सैनिक थे, भारत में कई सैनिक की घुसपैठ।

प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं का उल्लेख करते हुए, सांसद शेबेट ने कहा कि 15 जून को 5,000 सैनिक LAC पर मौजूद थे। ऐसा माना जाता है कि उनमें से कई ने 1962 की संधि के उल्लंघन में विवादित क्षेत्र को पार कर लिया था। वे भारतीय क्षेत्र के भाग में पहुँचे थे। हम चीन की आक्रामक गतिविधियों के खिलाफ भारत की तरफ खड़े हैं।

एक और प्रस्ताव: चीन को चेतावनी दी वह सीमा विवाद को बलपूर्वक न उकेले।

मूल भारतीय के अमेरिकी राजा कृष्णमूर्ति और 8 अन्य सांसदों ने भी सदन में प्रस्ताव रखा था। कहा कि, चीन सीमा पर तनाव को राजनीतिक रूप से कम करेगा, बल द्वारा नहीं।

प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान के लिए रखा जाएगा। भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू जी ने ट्रम्प प्रशासन को पत्र लिखकर लद्दाख मुद्दे के बारे में चीनी अधिकारियों से शिकायत की है।

अमेरिका ने 11 चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया।

अमेरिका ने 11 चीनी कंपनियों पर व्यापार प्रतिबंध लगा दिया हे। इन चीनी कंपनियों पर शिनजियांग में उइगर मुसलमानों के खिलाफ मानवाधिकार हनन में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

इस पर अमेरिकी वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि चीन असहाय मुसलमानों के खिलाफ अमेरिकी सामान का उपयोग न करे,”।

भारत के हित में अमेरिका का रुख: पूर्व विदेश सचिव शशांक

अमेरिका का मौजूदा रुख अभी भारत के हित में है ऐसा देखा जा सकता हे। सीमा पर, दुनिया का सबसे बड़ा देश चीन की दादागिरी के खिलाफ भारत का समर्थन कर रहा है। वह सकारात्मकता है।

यह अमेरिका का यह दृष्टिकोण भारत के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का मार्गे सरल करेगा। रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस ताजा घटनाक्रम से साफ है कि अमेरिका उन सभी देशों का खुलकर समर्थन कर रहा है जो चीन के दबाव में आ रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन ने हांगकांग से लेकर वियतनाम और भारत तक सभी चीजों का समर्थन किया है। एक तरह से, चीन को यह स्पष्ट कर दिया है कि इस क्षेत्र पर हावी होने के उनके इरादों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

यद्यपि संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीन में व्यापार करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन राजनयिक स्तर पर यह समर्थन अंततः अमेरिकी कंपनियों तक पहुंच जाएगा।

अमेरिका का समर्थन भारत के दीर्घकालिक हित में है। चीनी निर्माण कंपनियों पर निर्भरता कम करने का यह सही समय है। अमेरिका इस काम में भारत की बहुत मदद कर सकता है।

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